satellite phone: महंगा, लेकिन दूरदराज में Communications का अद्भुत माध्यम!

आजकल के दौर में जब स्मार्टफोन हमारी जिंदगी का हिस्सा बन गया है, वहीं एक और फोन भी है जिसके बारे में हम अक्सर सुनते हैं -satellite phone। 

दिखने में बिल्कुल साधारण, बच्चों के खिलौने से मिलता-जुलता यह फोन, कीमत के मामले में आसमान छूता है।

आइए, इस ब्लॉग में हम satellite phone और सामान्य फोन के बीच के अंतर को समझेंगे, और जानेंगे कि आखिर ये फोन इतने महंगे क्यों होते हैं।

satellite phone  कैसे काम करते हैं?

सैटेलाइट फोन, जैसा कि नाम से ही पता चलता है, सैटेलाइट के माध्यम से काम करते हैं।

इस फोन से कॉल करने पर, कॉल सीधे सैटेलाइट तक जाता है और वहां से होकर रिसीवर तक पहुंचता है।

इस तकनीक की वजह से, सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल किसी भी स्थान पर किया जा सकता है, चाहे वहां नेटवर्क की कितनी भी समस्या क्यों न हो।

दूरदराज के इलाके, जंगल, समुद्र, या फिर ऊंचे पहाड़, कहीं भी सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल किया जा सकता है।

सैटेलाइट फोन और सामान्य फोन में अंतर:

  • सैटेलाइट फोन सैटेलाइट के माध्यम से काम करते हैं, जबकि सामान्य फोन सेलुलर टावरों के माध्यम से काम करते हैं।
  • सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल किसी भी स्थान पर किया जा सकता है, जबकि सामान्य फोन के लिए नेटवर्क की आवश्यकता होती है।
  • सैटेलाइट फोन बहुत महंगे होते हैं, जबकि सामान्य फोन सस्ते होते हैं।
  • सैटेलाइट फोन का इस्तेमाल भारत में आम जनता के लिए प्रतिबंधित है, जबकि सामान्य फोन का इस्तेमाल कोई भी कर सकता है।

सैटेलाइट फोन इतने महंगे क्यों होते हैं?

सैटेलाइट फोन की उच्च लागत के कई कारण हैं:

  • तकनीक: सैटेलाइट फोन में जटिल तकनीक का इस्तेमाल होता है, जिसके निर्माण में अधिक लागत आती है।
  • सेवा: सैटेलाइट फोन सेवा प्रदान करने के लिए विशेष बुनियादी ढांचे की आवश्यकता होती है, जो बहुत महंगा होता है।
  • मांग: सैटेलाइट फोन की मांग कम होती है, जिसके कारण इनकी कीमतें अधिक होती हैं।

सैटेलाइट फोन निश्चित रूप से एक अद्भुत तकनीक है जो दूरदराज के इलाकों में संचार का साधन प्रदान करती है।

लेकिन उच्च लागत और भारत में प्रतिबंधित होने के कारण, ये आम आदमी की पहुंच से दूर हैं ।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *