Linkedin के Co-Founder का अनोखा प्रयोग! नकली अवतार ने दिया असली इंटरव्यू

पिछले कुछ महीनों में एआई टेक्नोलॉजी की मदद से डीपफेक कंटेंट ने लोगों को काफी नुकसान पहुंचाया है। लेकिन, इस टेक्नोलॉजी का सकारात्मक पक्ष भी हो सकता है, जिसके बारे में लिंक्डइन के सह-संस्थापक रीड हॉफमैन ने चर्चा की है।

अनोखा प्रयोग:

हॉफमैन ने डीपफेक टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल करके अपना ही क्लोन बनाया, जो दिखने, बोलने, चलने और भावों में भी एकदम असली हॉफमैन जैसा ही लग रहा था। उसके बाद हॉफमैन के नकली रूप ने एक असली इंटरव्यू दिया।

प्रयोग का उद्देश्य:

हॉफमैन का कहना है कि उन्होंने यह प्रयोग डिजिटल ट्विन टेक्नोलॉजी की क्षमताओं का परीक्षण करने के लिए किया है। उनका मानना है कि डीपफेक टेक्नोलॉजी बहुत सारे लोगों को नुकसान पहुंचा सकती है, लेकिन इसके सकारात्मक पहलुओं को भी जानना काफी जरूरी है।

प्रतिक्रियाएं:

हॉफमैन के इस प्रयोग ने सोशल मीडिया पर तहलका मचा दिया है। लोग इस पर अलग-अलग तरह की प्रतिक्रियाएं दे रहे हैं। पेटीएम के संस्थापक विजय शेकर शर्मा ने भी इस प्रयोग की सराहना की है।

हॉफमैन का यह प्रयोग न केवल टेक्नोलॉजी वर्ल्ड में नई चर्चाएं शुरू करता है, बल्कि यह हमें डिजिटल वर्ल्ड में मौजूद अनंत संभावनाओं के बारे में सोचने के लिए भी मजबूर करता है।

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